भूमिका
गणित में घातांक (Exponents) और करणी (Surds) दो अत्यंत महत्वपूर्ण अवधारणाएँ हैं। इनका प्रयोग गणनाओं को सरल और व्यवस्थित बनाने के लिए किया जाता है। चाहे बीजगणित हो, अंकगणित हो या प्रतिस्पर्धी परीक्षा, घातांक और करणी का ज्ञान अनिवार्य है।
घातांक (Exponent) क्या है?
परिभाषा
जब किसी संख्या को स्वयं से बार-बार गुणा किया जाता है, तो उसे घातांक रूप में व्यक्त किया जाता है।
यदि किसी संख्या aaa को nnn बार स्वयं से गुणा किया जाए, तो उसे इस प्रकार लिखा जाता है — an=a×a×a…n बारa^n = a \times a \times a \dots n\ बारan=a×a×a…n बार
यहाँ aaa को आधार (Base) और nnn को घातांक (Exponent) कहा जाता है।
उदाहरण:
- 23=2×2×2=82^3 = 2 \times 2 \times 2 = 823=2×2×2=8
- 54=5×5×5×5=6255^4 = 5 \times 5 \times 5 \times 5 = 62554=5×5×5×5=625
घातांक के नियम (Laws of Exponents)
नीचे घातांकों से जुड़े कुछ प्रमुख नियम दिए गए हैं जो गणनाओं को सरल बनाते हैं:
| क्रमांक | नियम | सूत्र | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| 1 | समान आधार का गुणन | am×an=am+na^m \times a^n = a^{m+n}am×an=am+n | 23×24=27=1282^3 \times 2^4 = 2^{7} = 12823×24=27=128 |
| 2 | समान आधार का भाग | aman=am−n\frac{a^m}{a^n} = a^{m-n}anam=am−n | 5652=54=625\frac{5^6}{5^2} = 5^4 = 6255256=54=625 |
| 3 | घात का घात | (am)n=am×n(a^m)^n = a^{m \times n}(am)n=am×n | (32)3=36=729(3^2)^3 = 3^6 = 729(32)3=36=729 |
| 4 | गुणनफल का घात | (ab)n=anbn(ab)^n = a^n b^n(ab)n=anbn | (2×3)2=4×9=36(2 \times 3)^2 = 4 \times 9 = 36(2×3)2=4×9=36 |
| 5 | भागफल का घात | (ab)n=anbn\left(\frac{a}{b}\right)^n = \frac{a^n}{b^n}(ba)n=bnan | (34)2=916\left(\frac{3}{4}\right)^2 = \frac{9}{16}(43)2=169 |
| 6 | शून्य घात नियम | a0=1a^0 = 1a0=1 (यदि a≠0a \neq 0a=0) | 70=17^0 = 170=1 |
| 7 | ऋणात्मक घात नियम | a−n=1ana^{-n} = \frac{1}{a^n}a−n=an1 | 4−2=1164^{-2} = \frac{1}{16}4−2=161 |
| 8 | भिन्न घात | amn=amna^{\frac{m}{n}} = \sqrt[n]{a^m}anm=nam | 823=643=48^{\frac{2}{3}} = \sqrt[3]{64} = 4832=364=4 |
करणी (Surds) क्या है?
परिभाषा
वे संख्याएँ जिन्हें किसी भिन्न या पूर्णांक रूप में सरल नहीं किया जा सकता और जो मूल चिह्न (√) के साथ रहती हैं, उन्हें करणी कहते हैं।
उदाहरण के लिए: 2,3,5,73\sqrt{2}, \sqrt{3}, \sqrt{5}, \sqrt[3]{7}2,3,5,37
ये सभी अपरिमेय संख्याएँ हैं और करणी कहलाती हैं।
करणी के नियम (Laws of Surds)
- गुणन नियम: a×b=a×b\sqrt{a} \times \sqrt{b} = \sqrt{a \times b}a×b=a×b उदाहरण: 3×12=36=6\sqrt{3} \times \sqrt{12} = \sqrt{36} = 63×12=36=6
- भाग नियम: ab=ab\frac{\sqrt{a}}{\sqrt{b}} = \sqrt{\frac{a}{b}}ba=ba उदाहरण: 455=9=3\frac{\sqrt{45}}{\sqrt{5}} = \sqrt{9} = 3545=9=3
- जोड़ और घटाव नियम:
केवल समान करणी (like surds) को जोड़ा या घटाया जा सकता है। 32+52=823\sqrt{2} + 5\sqrt{2} = 8\sqrt{2}32+52=82 परंतु 2+3\sqrt{2} + \sqrt{3}2+3 को सरल नहीं किया जा सकता। - करणी का सरलीकरण: 72=36×2=62\sqrt{72} = \sqrt{36 \times 2} = 6\sqrt{2}72=36×2=62
- युक्तिकरण (Rationalization):
यदि किसी भिन्न के हर में करणी हो, तो उसे हटाने के लिए अंश और हर को उचित करणी से गुणा किया जाता है।
उदाहरण: 13=33\frac{1}{\sqrt{3}} = \frac{\sqrt{3}}{3}31=33 और 13+2=3−2\frac{1}{\sqrt{3} + \sqrt{2}} = \sqrt{3} – \sqrt{2}3+21=3−2
घातांक और करणी के बीच संबंध
घातांक और करणी दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। an=a1n\sqrt[n]{a} = a^{\frac{1}{n}}na=an1
अर्थात् किसी मूल को घातांक के भिन्न रूप में लिखा जा सकता है।
उदाहरण: 1634=(164)3=23=816^{\frac{3}{4}} = (\sqrt[4]{16})^3 = 2^3 = 81643=(416)3=23=8
(FAQs)
प्रश्न 1: घातांक का शून्य नियम क्या है?
उत्तर: किसी भी गैर-शून्य संख्या का शून्य घात 1 के बराबर होता है, अर्थात् a0=1a^0 = 1a0=1।
प्रश्न 2: ऋणात्मक घातांक का क्या अर्थ है?
उत्तर: ऋणात्मक घातांक का मतलब होता है उसका व्युत्क्रम। जैसे a−n=1ana^{-n} = \frac{1}{a^n}a−n=an1।
प्रश्न 3: करणी क्या होती है?
उत्तर: ऐसी संख्या जो किसी पूर्ण वर्ग या घन के रूप में नहीं लिखी जा सकती, और जो मूल चिह्न के साथ रहती है, करणी कहलाती है। जैसे 2,3\sqrt{2}, \sqrt{3}2,3 आदि।
प्रश्न 4: क्या करणी को जोड़ा जा सकता है?
उत्तर: हाँ, लेकिन केवल तब जब करणी समान हो। जैसे 35+25=553\sqrt{5} + 2\sqrt{5} = 5\sqrt{5}35+25=55।
प्रश्न 5: घातांक और करणी में क्या संबंध है?
उत्तर: किसी करणी को घातांक के भिन्न रूप में लिखा जा सकता है — an=a1/n\sqrt[n]{a} = a^{1/n}na=a1/n।
निष्कर्ष
घातांक गणित को संक्षिप्त रूप में व्यक्त करने का तरीका है जबकि करणी अपरिमेय मूलों का प्रतिनिधित्व करती है। दोनों अवधारणाएँ गणना और बीजगणितीय हल को आसान बनाती हैं। इनके नियमों का अभ्यास करने से गणितीय प्रश्नों को तेजी से हल किया जा सकता है।